गुरुपर्व का दिन सदियों से भारत की आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक रहा है। इसी अवसर पर वृंदावन धाम में आयोजित हुआ परम पूज्य रसिक संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का विशेष सत्संग, जिसने भक्तों के हृदय में नया प्रकाश भर दिया।
महाराज जी ने अपने प्रवचन में बताया कि “गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह चेतना है जो हमें हमारी आत्मा से जोड़ती है।” उन्होंने कहा कि “भक्ति का अर्थ है अपने अहंकार का अंत और समर्पण का आरंभ।”
‘गुरु बड़ी’ के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जीवन में गुरु का महत्व किसी दीपक में बाती की तरह है — जो खुद जलकर हमें दिशा दिखाता है।
प्रेमानंद महाराज जी ने कहा कि आधुनिक जीवन की आपाधापी में लोग शांति खो चुके हैं। ऐसे में भक्ति और गुरु की शरण में जाना ही सच्चा समाधान है।
उन्होंने युवाओं को भी संदेश दिया कि “गुरु वह दर्पण है जिसमें तुम्हें अपना सच्चा रूप दिखाई देता है।”
सत्संग में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे। कई भक्तों ने बताया कि उन्हें लगा मानो उनके जीवन की सभी उलझनें मिट गई हों। सोशल मीडिया पर भी महाराज जी के प्रवचन के वीडियो को लाखों व्यूज़ मिल रहे हैं।
‘गुरु बड़ी’ का यह दिव्य संदेश हमें याद दिलाता है कि जीवन का सार केवल पाने में नहीं, बल्कि समर्पण में है। प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के शब्दों ने यह साबित कर दिया कि जब भक्ति सच्ची हो, तो मार्ग स्वयं प्रकाशित हो जाता है।
Q1. ‘गुरु बड़ी’ का क्या अर्थ है?
‘गुरु बड़ी’ प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का प्रवचन विषय है, जिसमें उन्होंने गुरु के महत्व और जीवन में उसके प्रकाश की भूमिका बताई।
Q2. यह सत्संग कहां हुआ था?
यह दिव्य सत्संग वृंदावन धाम में आयोजित किया गया, जहां हजारों भक्त उपस्थित थे।
Q3. इस सत्संग का उद्देश्य क्या था?
भक्तों को भक्ति, समर्पण और गुरु-शिष्य परंपरा की वास्तविक भावना से जोड़ना।
Q4. क्या इस प्रवचन को ऑनलाइन देखा जा सकता है?
हाँ, यह प्रवचन कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे YouTube और Facebook पर उपलब्ध है।